फोनपी को भारत वापस आने के लिए चुकाने थे 8,000 करोड़ रुपये का टैक्स: सीईओ

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कंपनी ने कहा कि उसने अनुमान लगाया है कि उसे 7,300 करोड़ रुपये का संचयी नुकसान उठाना पड़ सकता है, हालांकि, भविष्य के मुनाफे से इसकी भरपाई हो जाएगी। 10 बिलियन डॉलर से अधिक की वैल्यूएशन कंपनी ने कहा कि व्यावसायिक अधिवास के संबंध में स्थानीय कानून प्रगतिशील नहीं हैं।

नई दिल्ली। वित्तीय प्रौद्योगिकी कंपनी फोनपे ने बुधवार को कहा कि भारत में अपना आधार फिर से स्थापित करने के लिए उसे कर के रूप में 8,000 करोड़ रुपये का भुगतान करना होगा। कंपनी ने कहा कि उसने अनुमान लगाया है कि उसे 7,300 करोड़ रुपये का संचयी नुकसान उठाना पड़ सकता है, हालांकि, भविष्य के मुनाफे से इसकी भरपाई हो जाएगी। 10 बिलियन डॉलर से अधिक की वैल्यूएशन कंपनी ने कहा कि व्यावसायिक अधिवास के संबंध में स्थानीय कानून प्रगतिशील नहीं हैं।

फोनपे के सह-संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) समीर निगम ने एक ऑनलाइन सत्र के दौरान कहा कि कंपनी अधिवास के संबंध में मौजूदा कानून के कारण, कर्मचारी ‘कर्मचारी स्टॉक स्वामित्व योजना’ (ईएसओपी) के तहत सभी लाभ खो चुके हैं। धोना पड़ा इस मौके पर कंपनी के को-फाउंडर और चीफ टेक्नोलॉजी ऑफिसर राहुल चारी भी मौजूद थे। निगम ने कहा, “यदि आप भारत को अपना अधिवास बनाना चाहते हैं, तो आपको एक नया बाजार मूल्यांकन करना होगा और करों का भुगतान करना होगा।

हमारे निवेशकों को भारत वापस आने की अनुमति के लिए करीब 8000 करोड़ रुपये चुकाने पड़े। यदि कोई व्यवसाय पूरी तरह से परिपक्व नहीं होता है, तो यह उसके लिए एक बड़ा झटका है।” उन्होंने कहा कि फोनपे झटके को झेलने में सक्षम है क्योंकि इसमें वॉलमार्ट और टेनसेंट जैसे दीर्घकालिक निवेशक हैं। PhonePe अक्टूबर 2022 में भारत लौटा।

परित्याग:प्रभासाक्षी ने इस खबर को संपादित नहीं किया है। यह खबर पीटीआई के ओरल फीड से प्रकाशित हुई है।




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